Wednesday, July 23, 2008

प्रयास

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चलते चलते दो साल गुसार गए!
जानते नही आगे क्या होगा
इसी हालात में पहले भी थे!
तब भी जाने नही आगे क्या होगा


उन आंखों में सपना नही थे!
अब मैं मेरा सपना उनके आखों में देखने लगा!
उन दिलों में चाहत नही थी!
अब मेरे चाहतें को उन दिलों महसूस करने लगा!
उन दिमाग में विचारों नही थी!
अब मेरे विचारों से उनके विचारों मिलने लगा!
उस जिंदगी में कोई ख्वाहिश नही थी!
अब उन जिंदगी का कहीं सारे तात्पर्य होने लगा!

हम अब जान गएँ हमारी दक्षता!
और पता चल गया हमारा मकसद!
हमें चाहिए उनहे एक विकास!
और उसके लिए हम करते रहेंगे प्रयास!

7 comments:

anuradha said...

great poem sir...aapne bht bht acha likha hai....n ismei koi bhi galati nahi hai....
u r too good.....

So nia said...

So sweetttt...well tried.

Banvri said...

aww this is sooooooooo sweeeeeeeeeeet selva :)

i don want to get into hindi matra n anything else but only on emotions u poured in ur wrds :)

selva ganapathy said...

Thanks Anuradha, Sonia and Deepti! :D

Jishnu said...

Selva...
True emotions.. beautifully expressed...

Gouri Chugh said...

waah waah sir! aap to hindi me bhi apne vichar vyakt karne bahut saksham hain. kafi prerit karne wale shabd hain...

selva ganapathy said...

Thanks Nikhil :)

haan Gouri jee... sab aap logon ki dhu ke wajad se.....